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पूर्वखण्ड — आचारकाण्ड · अध्याय 116

तिथ्यादि व्रत-वर्णन

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श्लोक 1 (garuda.1.116.1)

ब्रह्मोवाच । व्रतानि व्यास वक्ष्यामि हरिर्यैः सर्वदो भवेत् । सर्वमासर्क्षतिथिषु वारेषु हरिरर्चितः

brahmovāca vratāni vyāsa vakṣyāmi hariryaiḥ sarvado bhavet sarvamāsarkṣatithiṣu vāreṣu harirarcitaḥ

ब्रह्मा जी ने कहा — हे व्यास! मैं उन व्रतों का वर्णन करूँगा जिनसे हरि सब कुछ देने वाले बनते हैं। प्रत्येक मास, नक्षत्र, तिथि और वार में हरि की ही पूजा होती है।

श्लोक 2 (garuda.1.116.2)

एकभक्तेन नक्तेन उपवासफलादिना । ददाति धनधान्यादि पुत्रराज्यजयादिकम्

ekabhaktena naktena upavāsaphalādinā dadāti dhanadhānyādi putrarājyajayādikam

एक बार भोजन, केवल रात्रि में भोजन, उपवास, फलाहार आदि द्वारा यह व्रत धन, धान्य, पुत्र, राज्य और विजय आदि प्रदान करता है।

श्लोक 3 (garuda.1.116.3)

वैश्वानरः प्रतिपदि कुबेरः पूजितोऽर्थदः । उपोष्य ब्रह्मा प्रतिपद्यर्चितः श्रीस्तथाश्विनी

vaiśvānaraḥ pratipadi kuberaḥ pūjito'rthadaḥ upoṣya brahmā pratipadyarcitaḥ śrīstathāśvinī

प्रतिपदा को वैश्वानर, तथा पूजित कुबेर धन देने वाले हैं। उपवास करके प्रतिपदा को ब्रह्मा, श्री और अश्विनीकुमारों की भी पूजा करनी चाहिए।

श्लोक 4 (garuda.1.116.4)

द्वितीयायां यमो लक्ष्मीनारायण इहार्थदः । तृतीयायां त्रिदेवाश्च गौरीविघ्नेशशङ्कराः

dvitīyāyāṁ yamo lakṣmīnārāyaṇa ihārthadaḥ tṛtīyāyāṁ tridevāśca gaurīvighneśaśaṅkarāḥ

द्वितीया को यम, तथा लक्ष्मी-नारायण धन देने वाले हैं। तृतीया को त्रिदेव, गौरी, विघ्नेश और शंकर की पूजा होती है।

श्लोक 5 (garuda.1.116.5)

चतुर्थ्यां च चतुर्व्यूहः पञ्चम्यामर्चितो हरिः । कार्तिकेयो रविः षष्ठ्यां सप्तम्यां भास्करोऽर्थदः

caturthyāṁ ca caturvyūhaḥ pañcamyāmarcito hariḥ kārtikeyo raviḥ ṣaṣṭhyāṁ saptamyāṁ bhāskaro'rthadaḥ

चतुर्थी को चतुर्व्यूह की, पंचमी को हरि की पूजा होती है। षष्ठी को कार्तिकेय और सूर्य की, सप्तमी को सूर्य धन देने वाले हैं।

श्लोक 6 (garuda.1.116.6)

दुर्गाष्टम्यां नवम्यां च मातरोऽथ दिशोऽर्थदाः । दशम्यां च यमश्चन्द्र एकादश्यामृषीन्यजेत्

durgāṣṭamyāṁ navamyāṁ ca mātaro'tha diśo'rthadāḥ daśamyāṁ ca yamaścandra ekādaśyāmṛṣīnyajet

अष्टमी को दुर्गा, नवमी को मातृगण और दिशाओं के देवता धन देने वाले हैं। दशमी को यम और चन्द्रमा, एकादशी को ऋषियों की पूजा करनी चाहिए।

श्लोक 7 (garuda.1.116.7)

द्वादश्यां च हरिः कामस्त्रयोदश्यां महेश्वरः । चतुर्दश्यां पञ्चदश्यां ब्रह्मा च पितरोऽर्थदाः

dvādaśyāṁ ca hariḥ kāmastrayodaśyāṁ maheśvaraḥ caturdaśyāṁ pañcadaśyāṁ brahmā ca pitaro'rthadāḥ

द्वादशी को हरि और काम, त्रयोदशी को महेश्वर की पूजा होती है। चतुर्दशी और पूर्णिमा को ब्रह्मा और पितर धन देने वाले हैं।

श्लोक 8 (garuda.1.116.8)

अमावास्यां पूजनीया वारा वै भास्करादयः । नक्षत्राणि च योगाश्च पूजिताः सर्वदायकाः

amāvāsyāṁ pūjanīyā vārā vai bhāskarādayaḥ nakṣatrāṇi ca yogāśca pūjitāḥ sarvadāyakāḥ

अमावस्या को पितरों की पूजा करनी चाहिए। सूर्य आदि ग्रहों के अनुसार वार, तथा पूजित नक्षत्र और योग — ये सभी सब कुछ देने वाले हैं।

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