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पूर्वखण्ड — आचारकाण्ड · अध्याय 77

पुलक-परीक्षण

अध्याय 76अध्याय-सूचीअध्याय 78

श्लोक 1 (garuda.1.77.1)

॥सूत उवाच ॥ पुण्येषु पर्वतवरेषु च निम्नगासु स्थानान्तरेषु च तथोत्तरदेशगत्वात् ॥ संस्थापिताः स्वनखबाहुगतेः प्रकाशं संपूज्य दानवपतिं प्रथिते प्रदेशे

.sūta uvāca . puṇyeṣu parvatavareṣu ca nimnagāsu sthānāntareṣu ca tathottaradeśagatvāt . saṁsthāpitāḥ svanakhabāhugateḥ prakāśaṁ saṁpūjya dānavapatiṁ prathite pradeśe

सूत ने कहा — श्रेष्ठ पुण्य पर्वतों में, नदियों में, तथा अन्य स्थानों में, और उत्तर प्रदेश में जाकर भी — दैत्यराज के अपने नाखूनों और भुजाओं की गति से जमा हुए, उस प्रसिद्ध प्रदेश में दानव-राज को पूजते हुए —

श्लोक 2 (garuda.1.77.2)

दाशार्णवागदर (व) मेकलकालगादौ गुञ्जाञ्जनक्षौद्रमृणालवर्णाः ॥ गन्धर्ववह्निकदलीसदृशावभासा एते प्रशस्ताः पुलकाः प्रसूताः

dāśārṇavāgadara (va) mekalakālagādau guñjāñjanakṣaudramṛṇālavarṇāḥ . gandharvavahnikadalīsadṛśāvabhāsā ete praśastāḥ pulakāḥ prasūtāḥ

दशार्णव, अगद, एकल, कालग आदि में, गुंजा-बीज, अंजन, मधु और कमल-रेशे के वर्ण वाले, गन्धर्व-अग्नि और केले के समान आभा वाले — ये श्रेष्ठ पुलक-मणि उत्पन्न होते हैं।

श्लोक 3 (garuda.1.77.3)

शङ्खाब्जभृङ्गार्कविचित्रभङ्गा सूत्रैरु (र्व्य) पेताः परमाः पवित्राः ॥ मङ्गल्ययुक्ता बहुभक्तिचित्रा वृद्धिप्रदास्ते पुलका भवन्ति

śaṅkhābjabhṛṅgārkavicitrabhaṅgā sūtrairu (rvya) petāḥ paramāḥ pavitrāḥ . maṅgalyayuktā bahubhakticitrā vṛddhipradāste pulakā bhavanti

शंख, कमल, भृंग और सूर्य के विविध रंगों से युक्त, भीतरी तन्तुओं सहित — परम पवित्र, मंगलमय, विविध रंगों से चित्रित, समृद्धि देने वाले — ऐसे होते हैं पुलक-मणि।

श्लोक 4 (garuda.1.77.4)

काका (क.) श्वरासभसृगालवृकोग्ररूपैर्गृध्रैः समांसरुधिरार्द्रमुखैरुपेताः ॥ मृत्युप्रदाश्च विदुषा परिवर्जनीया मूल्यं पलस्य कथितं च शतानि पञ्च

kākā (ka.) śvarāsabhasṛgālavṛkograrūpairgṛdhraiḥ samāṁsarudhirārdramukhairupetāḥ . mṛtyupradāśca viduṣā parivarjanīyā mūlyaṁ palasya kathitaṁ ca śatāni pañca

जो कौवे, गधे, भैंसे, सियार, क्रूर भेड़िये और गिद्ध जैसे रूपों से युक्त हों, माँस और रक्त से गीले मुख वाले हों — वे मृत्यु देने वाले हैं और विद्वानों को उनका त्याग करना चाहिए। एक पल का मूल्य पाँच सौ बताया गया है।

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