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पूर्वखण्ड — आचारकाण्ड · अध्याय 90

प्रम्लोचा-आगमन

अध्याय 89अध्याय-सूचीअध्याय 91

श्लोक 1 (garuda.1.90.1)

मार्कण्डेय उवाच । ततस्तस्मान्नदीमध्यात्समुत्तस्थौ मनोरमा । प्रम्लौचा नाम तन्वङ्गी तत्समीपे वराप्सराः

mārkaṇḍeya uvāca tatastasmānnadīmadhyātsamuttasthau manoramā pramlaucā nāma tanvaṅgī tatsamīpe varāpsarāḥ

मार्कण्डेय ने कहा — तब उस नदी के मध्य से एक मनोहर, कोमलांगी अप्सरा उत्पन्न हुई, जिसका नाम प्रम्लोचा था, वह उसके निकट प्रकट हुई।

श्लोक 2 (garuda.1.90.2)

सा चोवाच महात्मानं रुचिं सुमधुराक्षरम् । प्रसादयामास भूयः प्रम्लोचा च वराप्सराः

sā covāca mahātmānaṁ ruciṁ sumadhurākṣaram prasādayāmāsa bhūyaḥ pramlocā ca varāpsarāḥ

उस श्रेष्ठ अप्सरा प्रम्लोचा ने महात्मा रुचि से मधुर वाणी में कहा, और उन्हें पुनः प्रसन्न करने का प्रयत्न किया।

श्लोक 3 (garuda.1.90.3)

अतीवरूपिणी कन्या मत्प्रसाद्वराङ्गना । जाता वरुणपुत्रेण पुष्करेण महात्मना

atīvarūpiṇī kanyā matprasādvarāṅganā jātā varuṇaputreṇa puṣkareṇa mahātmanā

'मेरे वरदान से वरुणपुत्र महात्मा पुष्कर के द्वारा एक अत्यंत सुंदर कन्या उत्पन्न हुई है।'

श्लोक 4 (garuda.1.90.4)

तां गृहाण मया दत्तां भार्य्यार्थे वरवर्णिनीम् । मनुर्महामतिस्तस्यां समुत्पत्स्यति ते सुतः

tāṁ gṛhāṇa mayā dattāṁ bhāryyārthe varavarṇinīm manurmahāmatistasyāṁ samutpatsyati te sutaḥ

'उस सुंदर कन्या को मेरे द्वारा दी गई पत्नी के रूप में ग्रहण करो; उससे तुम्हारा महाबुद्धिमान पुत्र मनु उत्पन्न होगा।'

श्लोक 5 (garuda.1.90.5)

मार्कंडेय उवाच । तथेति तेन साप्युक्ता तस्मात्तोयाद्वपुष्मतीम् । उद्दधार ततः कन्यां मानिनीं नाम नामतः

mārkaṁḍeya uvāca tatheti tena sāpyuktā tasmāttoyādvapuṣmatīm uddadhāra tataḥ kanyāṁ māninīṁ nāma nāmataḥ

मार्कण्डेय ने कहा — 'ऐसा ही हो' कहकर उसने उसे स्वीकार किया। तब प्रम्लोचा ने उस जल से मानिनी नामक सुंदर शरीर वाली कन्या को प्रकट किया।

श्लोक 6 (garuda.1.90.6)

नद्याश्च पुलिने तस्मिन्स मुनिर्मुनिसत्तमाः । जग्राह पाणिं विधिवत्समानीय महामुनिः

nadyāśca puline tasminsa munirmunisattamāḥ jagrāha pāṇiṁ vidhivatsamānīya mahāmuniḥ

हे मुनिश्रेष्ठो! उस नदी के तट पर उस महामुनि ने उसे लाकर विधिपूर्वक उसका पाणिग्रहण किया।

श्लोक 7 (garuda.1.90.7)

तस्यां तस्य सुतो जज्ञे महावीर्य्यो महाद्युतिः । रुचे रौच्य इति ख्यातो यो मया पूर्वमीरितः

tasyāṁ tasya suto jajñe mahāvīryyo mahādyutiḥ ruce raucya iti khyāto yo mayā pūrvamīritaḥ

उससे उसे महापराक्रमी, महातेजस्वी पुत्र उत्पन्न हुआ, जो रुचि का पुत्र होने के कारण रौच्य नाम से विख्यात हुआ — जिसका उल्लेख मैंने पहले किया था।

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