भूमि खण्ड · अध्याय 70
नरक की यातनाएँ
श्लोक 1 (padma.2.70.1)
मातलिरुवाच । यमपीडां प्रवक्ष्यामि महातीव्रां सुदारुणाम् । भुंजंति पापिनः सर्वे क्रूरास्ते ब्रह्मघातकाः
mātaliruvāca yamapīḍāṁ pravakṣyāmi mahātīvrāṁ sudāruṇām bhuṁjaṁti pāpinaḥ sarve krūrāste brahmaghātakāḥ
मातलि ने कहा — 'अब मैं यम की अत्यंत तीव्र और भयंकर पीड़ा का वर्णन करता हूँ, जिसे वे सभी क्रूर पापी, ब्रह्महत्यारे भोगते हैं।'
श्लोक 2 (padma.2.70.2)
क्वचित्पापाः प्रपच्यंते तीव्रेण करिषाग्निना । क्वचित्सिंहैर्वृकैर्व्याघ्रैर्दंशैः कीटैश्च दारुणैः
kvacitpāpāḥ prapacyaṁte tīvreṇa kariṣāgninā kvacitsiṁhairvṛkairvyāghrairdaṁśaiḥ kīṭaiśca dāruṇaiḥ
'कहीं पापी तीव्र कंडे की अग्नि में पकाए जाते हैं, कहीं सिंहों, भेड़ियों, बाघों, तथा भयंकर डाँस-कीटों द्वारा,'
श्लोक 3 (padma.2.70.3)
क्वचिन्महाजलौकोभिः क्वचिदाजगरैः पुनः । मक्षिकाभिश्च रौद्राभिः क्वचित्सर्पैर्विषोल्बणैः
kvacinmahājalaukobhiḥ kvacidājagaraiḥ punaḥ makṣikābhiśca raudrābhiḥ kvacitsarpairviṣolbaṇaiḥ
'कहीं विशाल जोंकों द्वारा, कहीं अजगरों द्वारा, भयंकर मक्खियों द्वारा, तथा कहीं तीव्र विषैले सर्पों द्वारा,'
श्लोक 4 (padma.2.70.4)
मत्तमातंगयूथैश्च बलोत्कृष्टैः प्रमाथिभिः । पंथानमुल्लिखद्भिश्च तीक्ष्णशृंगमहावृषैः
mattamātaṁgayūthaiśca balotkṛṣṭaiḥ pramāthibhiḥ paṁthānamullikhadbhiśca tīkṣṇaśṛṁgamahāvṛṣaiḥ
'मतवाले, बलशाली, कुचल देने वाले हाथियों के झुंडों द्वारा, तथा मार्ग को खोद देने वाले तीक्ष्ण सींगों वाले महाबैलों द्वारा,'
श्लोक 5 (padma.2.70.5)
महाशृंगैश्च महिषैर्दुष्टगात्रप्रबाधकैः । डाकिनीभिश्च रौद्राभिर्विकरालैश्च राक्षसैः
mahāśṛṁgaiśca mahiṣairduṣṭagātraprabādhakaiḥ ḍākinībhiśca raudrābhirvikarālaiśca rākṣasaiḥ
'विशाल सींगों वाली भैंसों द्वारा जो दुष्ट-शरीरों को पीड़ा देती हैं, भयंकर डाकिनियों द्वारा, तथा विकराल राक्षसों द्वारा,'
श्लोक 6 (padma.2.70.6)
व्याधिभिश्च महाघोरैः पीड्यमाना व्रजंति ते । महातुलां समारूढा दह्यमाना दवानले
vyādhibhiśca mahāghoraiḥ pīḍyamānā vrajaṁti te mahātulāṁ samārūḍhā dahyamānā davānale
'तथा महाघोर व्याधियों से पीड़ित होकर वे भटकते हैं; महातुला (विशाल तराजू) पर चढ़ाए जाकर वे दावानल में जलाए जाते हैं,'
श्लोक 7 (padma.2.70.7)
महावेगप्रधूतास्ते महाचंडेन वायुना । महापाषाणवर्षेण भिद्यमानाश्च सर्वतः
mahāvegapradhūtāste mahācaṁḍena vāyunā mahāpāṣāṇavarṣeṇa bhidyamānāśca sarvataḥ
'महाप्रचंड वायु द्वारा अत्यंत वेग से उड़ाए जाकर, तथा चारों ओर से महान पाषाण-वर्षा द्वारा विदीर्ण होकर,'
श्लोक 8 (padma.2.70.8)
पतद्भिर्वज्रनिर्घोषैरुल्कापातैश्च दारुणैः । प्रदीप्तांगारवर्षेण हन्यमाना व्रजंति ते
patadbhirvajranirghoṣairulkāpātaiśca dāruṇaiḥ pradīptāṁgāravarṣeṇa hanyamānā vrajaṁti te
'गिरते हुए गर्जनकारी वज्रों द्वारा, भयंकर उल्कापातों द्वारा, तथा प्रज्वलित अंगारों की वर्षा द्वारा आहत होकर वे भटकते हैं,'
श्लोक 9 (padma.2.70.9)
महता पांसुवर्षेण पूर्यमाणा यमं गताः । ये नराः पापकर्माणः पापं भुंजंति दारुणम्
mahatā pāṁsuvarṣeṇa pūryamāṇā yamaṁ gatāḥ ye narāḥ pāpakarmāṇaḥ pāpaṁ bhuṁjaṁti dāruṇam
'महान धूल-वर्षा से आच्छादित होते हैं — यमलोक को प्राप्त पापकर्मा मनुष्य इस प्रकार भयंकर पाप-फल भोगते हैं।'
श्लोक 10 (padma.2.70.10)
एवं पापविशेषेण पापिष्ठाः पापकारकाः । नरकं प्रतिभुंजंति बहुपीडासमाकुलम्
evaṁ pāpaviśeṣeṇa pāpiṣṭhāḥ pāpakārakāḥ narakaṁ pratibhuṁjaṁti bahupīḍāsamākulam
'इस प्रकार पाप-विशेष के अनुसार अत्यंत पापी, पापकर्ता, अनेक पीड़ाओं से भरे नरक को भोगते हैं।'
श्लोक 11 (padma.2.70.11)
एतत्ते सर्वमाख्यातं विवेकं पुण्यपापयोः । अन्यत्किं ते प्रवक्ष्यामि धर्मशास्त्रमनुत्तमम्
etatte sarvamākhyātaṁ vivekaṁ puṇyapāpayoḥ anyatkiṁ te pravakṣyāmi dharmaśāstramanuttamam
'यह सब पुण्य और पाप का विवेक तुम्हें बता दिया गया। अब और क्या बताऊँ — धर्मशास्त्र का यह सर्वोत्तम विषय?'