अवन्ती खण्ड · अध्याय 289
रामेश्वर तीर्थ की महिमा
श्लोक 1 (skanda.5.289.1)
श्रीमार्कण्डेय उवाच। नर्मदादक्षिणे कूले रामेश्वरमनुत्तमम् । तीर्थं पापहरं पुण्यं सर्वदुःखघ्नमुत्तमम् ।
śrīmārkaṇḍeya uvāca| narmadādakṣiṇe kūle rāmeśvaram anuttamam| tīrthaṁ pāpaharaṁ puṇyaṁ sarvaduḥkhaghnam uttamam||
श्री मार्कण्डेय बोले - नर्मदा के दक्षिण तट पर अनुपम रामेश्वर तीर्थ है, जो पापहारी, पुण्यदायी और समस्त दुःखों का नाशक उत्तम तीर्थ है।
श्लोक 2 (skanda.5.289.2)
तत्र तीर्थे तु ये स्नात्वा पूजयन्ति महेश्वरम् । महादेवं महात्मानं मुच्यन्ते सर्वकिल्बिषैः ।
tatra tīrthe tu ye snātvā pūjayanti maheśvaram| mahādevaṁ mahātmānaṁ mucyante sarvakilbiṣaiḥ||
उस तीर्थ में स्नान कर जो महात्मा महादेव महेश्वर की पूजा करते हैं, वे समस्त पापों से मुक्त हो जाते हैं।