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प्रभास खण्ड · अध्याय 233

पांडवेश्वरमाहात्म्यवर्णनम्

अध्याय 232अध्याय-सूचीअध्याय 234

श्लोक 1 (skanda.7.233.1)

ईश्वर उवाच। तत्रैव पूजयेद्देवि पंच लिंगानि भावितः। प्रतिष्ठितानि देवेशि पांडवैश्च महात्मभिः

īśvara uvāca| tatraiva pūjayeddevi paṁca liṅgāni bhāvitaḥ| pratiṣṭhitāni deveśi pāṁḍavaiśca mahātmabhiḥ

ईश्वर ने कहा—हे देवि, वहीं भावपूर्वक उन पाँच लिंगों की पूजा करनी चाहिए, जिन्हें हे देवेशि, महात्मा पाण्डवों ने प्रतिष्ठित किया था।

श्लोक 2 (skanda.7.233.2)

यस्तान्पूजयते भक्त्या स मुक्तः पातकैर्भवेत्

yastānpūjayate bhaktyā sa muktaḥ pātakairbhavet

जो उनकी भक्तिपूर्वक पूजा करता है, वह समस्त पापों से मुक्त हो जाता है।

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