प्रभास खण्ड · अध्याय 247
पिंगलादित्य पिंगादेवी शुक्रेश्वर माहात्म्य वर्णन
श्लोक 1 (skanda.7.247.1)
ईश्वर उवाच। तत्रैव संस्थितं पश्येत्सूर्यं पापप्रणाशनम्। तथा च पिंगलां देवीं पार्वतीरूपधारिणीम्
īśvara uvāca| tatraiva saṁsthitaṁ paśyetsūryaṁ pāpapraṇāśanam| tathā ca piṁgalāṁ devīṁ pārvatīrūpadhāriṇīm
ईश्वर ने कहा—वहीं स्थित पापनाशक सूर्यदेव तथा पार्वती के रूप को धारण करने वाली पिंगला देवी का दर्शन करना चाहिए।
श्लोक 2 (skanda.7.247.2)
तृतीयायां विशेषेण ह्युपवासं करोति यः। सर्वान्कामानवाप्नोति धनवान्पुत्रवान्भवेत्
tṛtīyāyāṁ viśeṣeṇa hyupavāsaṁ karoti yaḥ| sarvānkāmānavāpnoti dhanavānputravānbhavet
जो व्यक्ति तृतीया के दिन विशेष रूप से उपवास करता है, वह समस्त कामनाओं को प्राप्त करता है और धनवान तथा पुत्रवान होता है।
श्लोक 3 (skanda.7.247.3)
तत्रैव संस्थितं पश्येच्छुक्रेश्वरमिति श्रुतम्। तं दृष्ट्वा मानवो देवि मुक्तः स्यात्सर्वपातकैः
tatraiva saṁsthitaṁ paśyecchukreśvaramiti śrutam| taṁ dṛṣṭvā mānavo devi muktaḥ syātsarvapātakaiḥ
वहीं स्थित शुक्रेश्वर नाम से प्रसिद्ध लिंग का भी दर्शन करना चाहिए। हे देवी, उसका दर्शन करने वाला मनुष्य समस्त पापों से मुक्त हो जाता है।