प्रभास खण्ड · अध्याय 271
ज्वालेश्वर माहात्म्य वर्णन
श्लोक 1 (skanda.7.271.1)
ईश्वर उवाच। तस्यैव संनिकृष्टे तु लिंगं ज्वालेश्वरं स्मृतम्। शरः पाशुपतो यत्र ज्वलन्वै त्रिपुरारिणा॥
īśvara uvāca| tasyaiva sannikṛṣṭe tu liṅgaṁ jvāleśvaraṁ smṛtam| śaraḥ pāśupato yatra jvalanvai tripurāriṇā||
ईश्वर ने कहा—उसी (विदुराश्रम) के निकट ज्वालेश्वर नामक लिंग प्रसिद्ध है, जिस स्थान पर त्रिपुरारि (शिव) द्वारा प्रज्वलित पाशुपत अस्त्र,
श्लोक 2 (skanda.7.271.2)
पातितो यत्प्रदेशे तु तेन ज्वालेश्वरः स्मृतः। तं दृष्ट्वा मानवो देवि मुच्यते सर्वपातकैः॥
pātito yatpradeśe tu tena jvāleśvaraḥ smṛtaḥ| taṁ dṛṣṭvā mānavo devi mucyate sarvapātakaiḥ||
उस स्थान पर गिराया गया था, इसीलिए वह 'ज्वालेश्वर' नाम से प्रसिद्ध हुआ। हे देवी! उसका दर्शन करके मनुष्य समस्त पापों से मुक्त हो जाता है।