प्रभास खण्ड · अध्याय 310
कलंबेश्वरमाहात्म्यवर्णनम्
श्लोक 1 (skanda.7.310.1)
ईश्वर उवाच। तस्माद्वायव्यदिग्भागे धनुषां द्वितये स्थितम्। कलंबेश्वरनामानं सर्वपातकनाशनम्
īśvara uvāca| tasmādvāyavyadigbhāge dhanuṣāṁ dvitaye sthitam| kalaṁbeśvaranāmānaṁ sarvapātakanāśanam
ईश्वर ने कहा—उससे वायव्य दिशा में, दो धनुष की दूरी पर स्थित, सब पापों का नाशक 'कलम्बेश्वर' नामक तीर्थ है।
श्लोक 2 (skanda.7.310.2)
तं दृष्ट्वा पूजयित्वा च मुक्तः स्यात्सर्वकिल्बिषैः। सोमवारे त्वमावास्या तत्रैव बहुपुण्यदा। विप्राणां भोजनं देयं तत्र पुण्यफलेप्सुभिः
taṁ dṛṣṭvā pūjayitvā ca muktaḥ syātsarvakilbiṣaiḥ| somavāre tvamāvāsyā tatraiva bahupuṇyadā| viprāṇāṁ bhojanaṁ deyaṁ tatra puṇyaphalepsubhiḥ
उसे देखकर और पूजा करके मनुष्य सब पापों से मुक्त हो जाता है। सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या वहाँ विशेष रूप से बहुत पुण्यदायिनी होती है। वहाँ पुण्यफल की इच्छा रखने वालों को विप्रों को भोजन कराना चाहिए।