प्रभास खण्ड · अध्याय 326
महाकाल माहात्म्य वर्णन
श्लोक 1 (skanda.7.326.1)
ईश्वर उवाच। ततो गच्छेन्महादेवि तस्यैवोत्तरतः स्थितम्। महाकालेश्वरं देवं सर्वरक्षाकरं परम्
īśvara uvāca| tato gacchenmahādevi tasyaivottarataḥ sthitam| mahākāleśvaraṁ devaṁ sarvarakṣākaraṁ param
ईश्वर ने कहा—हे महादेवि, फिर उसी के उत्तर में स्थित, सबकी रक्षा करने वाले परम देव महाकालेश्वर के पास जाना चाहिए।
श्लोक 2 (skanda.7.326.2)
अधिष्ठाता पुरस्यास्य भैरवो रुद्ररूपधृक्। दर्शे च पूर्णिमायां च महापूजां प्रकारयेत्
adhiṣṭhātā purasyāsya bhairavo rudrarūpadhṛk| darśe ca pūrṇimāyāṁ ca mahāpūjāṁ prakārayet
इस नगर के अधिष्ठाता रुद्ररूपधारी भैरव हैं; अमावस्या और पूर्णिमा को उनकी महापूजा करनी चाहिए।
श्लोक 3 (skanda.7.326.3)
महोदये नरः स्नात्वा महाकालं प्रपश्यति। धनाढ्यो जायते लोके सप्तजन्मसहस्रकम्
mahodaye naraḥ snātvā mahākālaṁ prapaśyati| dhanāḍhyo jāyate loke saptajanmasahasrakam
महोदय में स्नान कर जो मनुष्य महाकाल के दर्शन करता है, वह सात हजार जन्मों तक इस लोक में धनाढ्य होता है।