प्रभास खण्ड · अध्याय 340
चण्डीश्वर माहात्म्य वर्णन
श्लोक 1 (skanda.7.340.1)
ईश्वर उवाच। ततो गच्छेन्महादेवि तत्र स्थाने तु संस्थितम्। चण्डीश्वरं महालिंगं सर्वपातकनाशनम्
īśvara uvāca| tato gacchenmahādevi tatra sthāne tu saṁsthitam| caṇḍīśvaraṁ mahāliṁgaṁ sarvapātakanāśanam
ईश्वर ने कहा—हे महादेवि, फिर उस स्थान पर जाना चाहिए जहाँ सर्वपापनाशक महालिंग चण्डीश्वर स्थित हैं।
श्लोक 2 (skanda.7.340.2)
तत्र शुक्लचतुर्द्दश्यां कार्तिके मासि भामिनि। उपवासपरो भूत्वा यः करोति प्रजागरम्। स याति परमं स्थानं यत्र देवो महेश्वरः
tatra śuklacaturddaśyāṁ kārtike māsi bhāmini| upavāsaparo bhūtvā yaḥ karoti prajāgaram| sa yāti paramaṁ sthānaṁ yatra devo maheśvaraḥ
वहाँ कार्तिक मास की शुक्ल चतुर्दशी को, हे भामिनि, जो उपवासपूर्वक जागरण करता है, वह उस परम स्थान को प्राप्त होता है जहाँ देव महेश्वर विराजमान हैं।