Skip to main content

प्रभास खण्ड · अध्याय 341

आशापूरविघ्नराजमाहात्म्यवर्णनम्

अध्याय 340अध्याय-सूचीअध्याय 342

श्लोक 1 (skanda.7.341.1)

ईश्वर उवाच। आशापूरं ततो गच्छेद्विघ्नराजमकल्मषम्। शशिभूषण वायव्ये संस्थितं विघ्ननाशनम्। आशां पूरयते यस्मात्तेनाशापूरकः स्मृतः

īśvara uvāca| āśāpūraṁ tato gacchedvighnarājamakalmaṣam| śaśibhūṣaṇa vāyavye saṁsthitaṁ vighnanāśanam| āśāṁ pūrayate yasmāttenāśāpūrakaḥ smṛtaḥ

ईश्वर ने कहा—तदनन्तर शशिभूषण (चन्द्रमौलि शिव) के वायव्य कोण में स्थित, विघ्नों का नाशक, निष्पाप विघ्नराज आशापूर के पास जाना चाहिए। चूँकि वे आशा को पूर्ण करते हैं, इसलिए वे आशापूरक कहलाते हैं।

श्लोक 2 (skanda.7.341.2)

यत्र रामेण देवेशि सीतया लक्ष्मणेन च। समाराध्य च विघ्नेशं प्राप्तं काममभीप्सितम्

yatra rāmeṇa deveśi sītayā lakṣmaṇena ca| samārādhya ca vighneśaṁ prāptaṁ kāmam abhīpsitam

हे देवेशि, जहाँ राम ने सीता और लक्ष्मण के साथ विघ्नेश की आराधना करके अभीष्ट फल प्राप्त किया।

श्लोक 3 (skanda.7.341.3)

यत्र चंद्रमसा देवि समाराध्य गणाधिपम्। लब्धं तद्वांछितं पूर्वं सर्वकुष्ठविनाशनम्

yatra candramasā devi samārādhya gaṇādhipam| labdhaṁ tadvāñchitaṁ pūrvaṁ sarvakuṣṭhavināśanam

हे देवि, जहाँ चन्द्रमा ने गणाधिप की आराधना करके पूर्वकाल में सर्वकुष्ठनाशक अभीष्ट वर प्राप्त किया था।

श्लोक 4 (skanda.7.341.4)

चतुर्थ्यां शुक्लपक्षे च मासि भाद्रपदे तथा। तत्र संपूज्य देवेशं मोदकैर्भोजयेद्द्विजान्

caturthyāṁ śuklapakṣe ca māsi bhādrapade tathā| tatra saṁpūjya deveśaṁ modakair bhojayed dvijān

भाद्रपद मास के शुक्लपक्ष की चतुर्थी को वहाँ देवेश का पूजन करके ब्राह्मणों को मोदकों से भोजन कराना चाहिए।

श्लोक 5 (skanda.7.341.5)

वाञ्छितां लभते सिद्धिं विघ्नराजप्रसादतः। क्षेत्रस्यास्य महादेवि रक्षार्थं तु मया पुरा

vāñchitāṁ labhate siddhiṁ vighnarājaprasādataḥ| kṣetrasyāsya mahādevi rakṣārthaṁ tu mayā purā

विघ्नराज की कृपा से मनुष्य अभीष्ट सिद्धि प्राप्त करता है। हे महादेवि, इस क्षेत्र की रक्षा के लिए मेरे द्वारा पूर्वकाल में...

श्लोक 6 (skanda.7.341.6)

ततो नियुक्तो देवेशि यायिनां विघ्ननाशनः

tato niyukto deveśi yāyināṁ vighnanāśanaḥ

हे देवेशि, तदनन्तर यह विघ्ननाशक यात्रियों (तीर्थयात्रियों) की रक्षा के लिए नियुक्त किया गया।

अध्याय 340अध्याय-सूचीअध्याय 342