प्रभास खण्ड · अध्याय 348
मन्त्रविभूषणागौरीमाहात्म्यवर्णनम्
श्लोक 1 (skanda.7.348.1)
ईश्वर उवाच। ततो गच्छेन्महादेवि देवीं मंत्रविभूषणाम्। भीमेश्वरस्य सान्निध्ये सोमेनाराधितां पुरा
īśvara uvāca| tato gacchenmahādevi devīṁ mantravibhūṣaṇām| bhīmeśvarasya sānnidhye somenārādhitāṁ purā
ईश्वर ने कहा—हे महादेवि, तदनन्तर भीमेश्वर के समीप स्थित मंत्रविभूषणा देवी के पास जाना चाहिए, जिनकी आराधना पूर्वकाल में सोम ने की थी।
श्लोक 2 (skanda.7.348.2)
श्रावणे मासि विधिना या नारी तां प्रपूजयेत्। तृतीयायां शुक्लपक्षे सा दुःखैर्मुच्यतेऽखिलैः
śrāvaṇe māsi vidhinā yā nārī tāṁ prapūjayet| tṛtīyāyāṁ śuklapakṣe sā duḥkhairmucyate'khilaiḥ
श्रावण मास में शुक्लपक्ष की तृतीया को जो नारी विधिपूर्वक उनका पूजन करती है, वह समस्त दुःखों से मुक्त हो जाती है।