प्रभास खण्ड · अध्याय 430
व्यासतीर्थ माहात्म्य वर्णन
श्लोक 1 (skanda.7.430.1)
॥ पुलस्त्य उवाच ॥ ततो व्यासेश्वरं गच्छेद्व्यासेन स्थापितं हि यत् । तं दृष्ट्वा जायते मर्त्यो मेधावी मतिमाञ्छुचिः । सप्तजन्मांतराण्येव व्यासस्य वचनं यथा
pulastya uvāca | tato vyāseśvaraṁ gacchedvyāsena sthāpitaṁ hi yat | taṁ dṛṣṭvā jāyate martyo medhāvī matimāñchuciḥ | saptajanmāntarāṇyeva vyāsasya vacanaṁ yathā
पुलस्त्य ने कहा - तदनन्तर व्यासेश्वर के पास जाना चाहिए, जो व्यास द्वारा ही स्थापित किया गया है। उसका दर्शन करके मनुष्य सात जन्मों तक मेधावी, बुद्धिमान् और पवित्र हो जाता है - ऐसा व्यास का वचन है।