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चतुर्थांश · अध्याय 16

तुर्वसु का वंश

अध्याय 15अध्याय-सूचीअध्याय 17

श्लोक 1 (vishnu.4.16.1)

पराशर उवाच । इत्येष समासतस्ते कथितः, तूर्वसोर्वंशमवधारय ।

parāśara uvāca ityeṣa samāsataste kathitaḥ, tūrvasorvaṁśamavadhāraya

पराशर जी ने कहा — इस प्रकार यह संक्षेप में तुमसे कहा गया; अब तुर्वसु का वंश जानो।

श्लोक 2 (vishnu.4.16.2)

तुर्वसोर्वह्निरात्मजः, वह्नेर्गोभानुः त्रैशांबः, तस्माच्च करंधमः, तस्यापि मरुत्तः, सोऽनपत्योऽभवत् । ततश्च पौरवं दुष्यंतं पुत्रमकल्पयत् । एवं ययातिशापात्तद्वंशः पौरवं वंशमाश्रितवान् ।

turvasorvahnirātmajaḥ, vahnergobhānuḥ traiśāṁbaḥ, tasmācca karaṁdhamaḥ, tasyāpi maruttaḥ, so'napatyo'bhavat tataśca pauravaṁ duṣyaṁtaṁ putramakalpayat evaṁ yayātiśāpāttadvaṁśaḥ pauravaṁ vaṁśamāśritavān

तुर्वसु का पुत्र वह्नि हुआ, वह्नि का गोभानु, फिर त्रैशांब, उससे करंधम, उसका भी पुत्र मरुत्त हुआ। वह निःसंतान रहा। तब उसने पौरव दुष्यंत को अपना पुत्र बना लिया। इस प्रकार ययाति के शाप के कारण वह वंश पौरव वंश में जा मिला।

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