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ॐ भवातीताय नमः

भवातीतः

Bhavātītaḥ

Root: bhava + atīta

Liberation·मोक्ष
Meaning

अर्थ

He who is beyond worldly existence, who stands outside the cycles of birth, decay, and death that constitute samsara

सांसारिक अस्तित्व से परे, जो जन्म, क्षय और मृत्यु के चक्रों के बाहर खड़े हैं जो संसार का गठन करते हैं

Word-by-Word Breakdown

शब्द-दर-शब्द विश्लेषण

भव

worldly existence, becoming

भव, सांसारिक अस्तित्व

अतीत

transcended, beyond

अतीत, परे, पार

Modern Context

आधुनिक संदर्भ

भव की जागरूकता, सांसारिक बनने के अनन्त चक्र में फँसे होने की, वही है जो सबसे गहरी आध्यात्मिक खोज चलाती है। हर हानि, हर अन्त, हर निराशा जिसे पलटा नहीं जा सकता, एक ही निदान की ओर इंगित करती है: अनुपाधिक अस्तित्व जो वादा करता है वह नहीं दे सकता। भवातीत उस प्रभु को नाम देता है जो इस पूरी संरचना के बाहर खड़े हैं, जो कुछ भी उठता और गुजरता है उसके साक्षी के रूप में, वह स्थायित्व जो प्रवाह में भाग नहीं लेता। शबरीमला यात्रा भक्त को भवातीत का एक संक्षिप्त लेकिन वास्तविक स्वाद देती है: भव की सामान्य संरचना के आंशिक रूप से बाहर जीने के ४१ दिन, उन प्रभु की ओर उन्मुख जो उससे परे खड़े हैं।

When to Chant

कब जपें

Chant when the impermanence and cyclical suffering of worldly existence is most apparent, turning the mind toward the Lord who stands beyond what is impermanent.

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