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ॐ अद्वितीयाय नमः

अद्वितीयः

Advitīyaḥ

Root: a + dvitīya

Knowledge·विद्या
Meaning

अर्थ

The one without a second, the non-dual absolute for whom no other being or thing exists as truly separate

द्वितीय के बिना, वह अद्वैत परम जिनके लिए कोई अन्य सत्ता या वस्तु वास्तव में अलग के रूप में विद्यमान नहीं

Word-by-Word Breakdown

शब्द-दर-शब्द विश्लेषण

not, without

बिना

द्वितीय

second, another

द्वितीय, दूसरा

Modern Context

आधुनिक संदर्भ

अद्वितीय नामों 216-220 में फैले सम्पूर्ण-परिपूर्ण-अपरिच्छिन्न-एकाकी-अद्वितीय अनुक्रम का दार्शनिक शिखर है। यह अनुक्रम 'पूर्ण' से 'सब ओर पूर्ण' से 'असीम' से 'एकाकी' से 'द्वितीय के बिना' तक बनता है, प्रत्येक नाम क्रमशः सीमितता की शर्तें छीलता है। 'अद्वितीय' छान्दोग्य उपनिषद् के महावाक्य से प्रसिद्ध वाक्यांश है: 'एकम् एवाद्वितीयम् ब्रह्म।' दत्तात्रेय के लिए अद्वितीय के रूप में यह एक दार्शनिक स्थिति नहीं बल्कि एक अनुभवात्मक तथ्य है। अवधूत गीता, दत्तात्रेय के लिए सबसे सीधे जिम्मेदार ग्रन्थ, की यह सबसे गहरी शिक्षा है।

When to Chant

कब जपें

Chant during Advaita Vedanta study, when contemplating the great saying 'Ekam Evadvitiyam Brahma' (Brahman is one without a second), or when all apparent duality dissolves in the depth of meditation.

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