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ॐ तन्त्रागमप्रणेत्रे नमः

तन्त्रागमप्रणेता

Tantrāgamapraṇetā

Root: tantra + āgama + praṇetṛ

Wisdom·ज्ञान
Meaning

अर्थ

The formulator of Tantra and Agama, the divine author who revealed the tantric and agamic systems of knowledge

तन्त्र और आगम के प्रवर्तक, वह दिव्य रचयिता जिन्होंने तान्त्रिक और आगमिक ज्ञान-पद्धतियाँ प्रकट कीं

Word-by-Word Breakdown

शब्द-दर-शब्द विश्लेषण

तन्त्र

the tantric scriptural tradition

तन्त्र शास्त्र परम्परा

आगम

the agamic revelation tradition

आगम प्रकाशन परम्परा

प्रणेता

formulator, author

प्रणेता, रचयिता

Modern Context

आधुनिक संदर्भ

तन्त्रागमप्रणेता दत्तात्रेय को तन्त्र और आगम दोनों पाठ्य परम्पराओं के स्रोत के रूप में स्थापित करता है। आगम शैव, वैष्णव और शाक्त परम्पराओं के प्रकाशित शास्त्र हैं, वेदों से अलग। 64 शैव आगम, 108 वैष्णव पञ्चरात्र आगम और शाक्त तन्त्र सभी दिव्य प्रकाशन का दावा करते हैं। आगम परम्परा आज मदुरै से चिदम्बरम तक तमिल शैव मन्दिरों में जीवित है, जहाँ आगमिक अनुष्ठान में प्रशिक्षित पुजारी (गुरुक्कल परम्परा) दत्तात्रेय के प्रकाशनों तक जाने वाली प्रथाओं को बनाए रखते हैं।

When to Chant

कब जपें

Chant when studying Shaiva or Shakta Agamas, during Tantric sadhana, or when exploring the esoteric dimensions of Dattatreya's teaching lineage.

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