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ॐ षट्कर्मनिरताय नमः

षट्कर्मनिरतः

Ṣaṭkarmaniratāḥ

Root: ṣaṭ + karma + nirata

Wisdom·ज्ञान
Meaning

अर्थ

The one absorbed in the six sacred duties, the master practitioner of all six brahminic and yogic disciplines

छह पवित्र कर्तव्यों में तल्लीन, छः ब्राह्मणिक और योगिक अनुशासनों के निपुण साधक

Word-by-Word Breakdown

शब्द-दर-शब्द विश्लेषण

षट्

six

छः

कर्म

duty, action

कर्म, कर्तव्य

निरत

absorbed in, devoted to

तल्लीन, समर्पित

Modern Context

आधुनिक संदर्भ

षट्कर्मनिरत का दोहरा अर्थ है। ब्राह्मणिक सन्दर्भ में षट्कर्म एक ब्राह्मण के छः कर्तव्य हैं: अध्ययन, अध्यापन, यज्ञ करना, यज्ञ कराना, दान देना और दान स्वीकार करना। दत्तात्रेय, एक ब्राह्मण ऋषि के पुत्र, सभी छः को मूर्त रूप देते हैं। तान्त्रिक सन्दर्भ में षट्कर्म छः अनुष्ठान क्रियाएँ हैं: शान्ति, वशीकरण, स्तम्भन, विद्वेषण, उच्चाटन और मारण। दत्तात्रेय की सभी छः में निपुणता उन्हें रूढ़िवादी और गूढ़ दोनों साधकों का प्राधिकरण बनाती है।

When to Chant

कब जपें

Chant when performing the six brahminic duties (adhyayana, adhyapana, yajna, yajana, dana, pratigraha), or when studying Tantra's six rituals.

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