ॐ कृशानुरेतसे नमः
कृशानुरेताः
Kṛśānuretāḥ
Root: kṛśānu + retas
अर्थ
Whose seed is fire, the one from whose divine essence the fire of transformation arises, whose creative power is the burning, purifying force of cosmic fire
जिनका बीज अग्नि है, वह जिनके दिव्य सार से परिवर्तन की अग्नि उत्पन्न होती है, जिनकी सृजनात्मक शक्ति ब्रह्माण्डीय अग्नि की जलती, शुद्ध करने वाली शक्ति है
शब्द-दर-शब्द विश्लेषण
कृशानु
fire, the divine archer, Agni
कृशानु, अग्नि, दिव्य धनुर्धर
रेतस्
seed, semen, the creative essence
रेतस्, बीज, सृजनात्मक सार
आधुनिक संदर्भ
कृशानुरेता (जिनका बीज अग्नि है) महान पौराणिक महत्त्व का नाम है: स्कंद पुराण में, शिव का अग्नि-बीज (उनके ध्यान के दौरान मुक्त) अग्नि द्वारा वहन किया गया और अंततः षण्मुख कार्तिकेय-स्कंद बन गया। भारत की यज्ञ परंपरा, जिसमें अग्नि दिव्य संवाद, आहुति और परिवर्तन का प्राथमिक माध्यम है, पूरी तरह इसी समझ पर निर्मित है। सूर्योदय पर लाखों घरों द्वारा किया जाने वाला गायत्री होम कृशानुरेता का प्रत्यक्ष उत्सव है।
कब जपें
ॐChant to honour the fire-natured creative power of Shiva, particularly during homa and yajña where fire is the medium through which creation, purification, and offering all operate simultaneously.
और सृष्टि नाम
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