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चतुर्थांश · अध्याय 22

इक्ष्वाकु वंश के भावी राजा

अध्याय 21अध्याय-सूचीअध्याय 23

श्लोक 1 (vishnu.4.22.1)

श्रीपराशर उवाच अतश्चेक्ष्वाकवो भविष्याः पार्थिवाः कथ्यन्ते

śrīparāśara uvāca ataścekṣvākavo bhaviṣyāḥ pārthivāḥ kathyante

श्रीपराशर जी ने कहा — अब इसके आगे इक्ष्वाकु-वंश के भावी राजाओं का वर्णन किया जाता है।

श्लोक 2 (vishnu.4.22.2)

बृहद्बलस्य पुत्रो बृहत्क्षणः

bṛhadbalasya putro bṛhatkṣaṇaḥ

बृहद्बल का पुत्र बृहत्क्षण होगा।

श्लोक 3 (vishnu.4.22.3)

तस्मादुरुक्षयस्तस्माच्च वत्सव्यूहस्ततश्च प्रतिव्योमस्तस्मादपि दिवाकरः

tasmādurukṣayastasmācca vatsavyūhastataśca prativyomastasmādapi divākaraḥ

उससे उरुक्षय, उससे वत्सव्यूह, फिर प्रतिव्योम, उसका भी दिवाकर होगा।

श्लोक 4 (vishnu.4.22.4)

तस्मात्सहदेवः सहदेवाद्बृहदश्वस्तत्सूनुर्भानुरथस्तस्य च प्रतीताश्वस्तस्यापि सुप्रतीकस्ततश्च मरुदेवस्ततः सुनक्षत्रस्तमात्किन्नरः

tasmātsahadevaḥ sahadevādbṛhadaśvastatsūnurbhānurathastasya ca pratītāśvastasyāpi supratīkastataśca marudevastataḥ sunakṣatrastamātkinnaraḥ

उससे सहदेव, सहदेव से बृहदश्व, उसका पुत्र भानुरथ, फिर प्रतीताश्व, उसका भी सुप्रतीक, फिर मरुदेव, फिर सुनक्षत्र, उससे किन्नर होगा।

श्लोक 5 (vishnu.4.22.5)

किन्नरादन्तरिक्षस्तस्मात्सुपर्णस्ततश्चामित्रजित्

kinnarādantarikṣastasmātsuparṇastataścāmitrajit

किन्नर से अंतरिक्ष, उससे सुपर्ण, फिर अमित्रजित् होगा।

श्लोक 6 (vishnu.4.22.6)

ततश्च बृहद्भाजस्तस्यापि धर्मी धर्मीणः कृतञ्जयः

tataśca bṛhadbhājastasyāpi dharmī dharmīṇaḥ kṛtañjayaḥ

उससे बृहद्भाज, उसका भी धर्मी, धर्मी से कृतंजय होगा।

श्लोक 7 (vishnu.4.22.7)

कृतञ्जयाद्रणञ्जयः

kṛtañjayādraṇañjayaḥ

कृतंजय से रणंजय होगा।

श्लोक 8 (vishnu.4.22.8)

रणञ्जयात्संजयस्तस्माच्छाक्यश्छाक्याच्छुद्धोदनस्तस्माद्राहुलस्ततः प्रसेनजित्

raṇañjayātsaṁjayastasmācchākyaśchākyācchuddhodanastasmādrāhulastataḥ prasenajit

रणंजय से संजय, उससे शाक्य, शाक्य से शुद्धोदन, उससे राहुल, फिर प्रसेनजित् होगा।

श्लोक 9 (vishnu.4.22.9)

ततश्च क्षुद्रकस्ततश्चज कुण्डकस्तस्मादपि सुरथः

tataśca kṣudrakastataścaja kuṇḍakastasmādapi surathaḥ

उससे क्षुद्रक, फिर कुंडक, उसका भी सुरथ होगा।

श्लोक 10 (vishnu.4.22.10)

तत्पुत्रश्च सुमित्रः

tatputraśca sumitraḥ

उसका पुत्र सुमित्र होगा।

श्लोक 11 (vishnu.4.22.11)

इत्येते चेक्ष्वाकवो बृहद्बलान्वयाः

ityete cekṣvākavo bṛhadbalānvayāḥ

ये सभी बृहद्बल की संतान इक्ष्वाकुवंशी राजा हैं।

श्लोक 12 (vishnu.4.22.12)

अत्रानुवंशश्लोकः

atrānuvaṁśaślokaḥ

यहां वंश-परंपरा का यह श्लोक है —

श्लोक 13 (vishnu.4.22.13)

इक्ष्वाकूणामयं वंशःसुमित्रान्तो भविष्यति । यतस्तं प्राप्य राजानं संस्थां प्राप्स्यति वै कलौ

ikṣvākūṇāmayaṁ vaṁśaḥsumitrānto bhaviṣyati yatastaṁ prāpya rājānaṁ saṁsthāṁ prāpsyati vai kalau

'इक्ष्वाकुओं का यह वंश सुमित्र पर समाप्त होगा; उस राजा को प्राप्त कर यह वंश कलियुग में ही अपने अंत को प्राप्त होगा।'

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