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ॐ भवरोगवैद्याय नमः

भवरोगवैद्यः

Bhavarogavaidyaḥ

Root: bhava + roga + vaidya

Healing·उपचार
Meaning

अर्थ

The physician of the disease of worldly existence, who diagnoses and heals the fundamental ailment of samsaric suffering

सांसारिक अस्तित्व के रोग के वैद्य, जो संसारी पीड़ा की मूलभूत व्याधि का निदान और उपचार करते हैं

Word-by-Word Breakdown

शब्द-दर-शब्द विश्लेषण

भव

worldly existence, becoming

भव, सांसारिक अस्तित्व

रोग

disease, illness

रोग, बीमारी

वैद्य

physician, healer

वैद्य, चिकित्सक

Modern Context

आधुनिक संदर्भ

आयुर्वेद, केरल की पारम्परिक चिकित्सा प्रणाली, रोग को केवल शरीर की खराबी नहीं बल्कि उनके पर्यावरण और ब्रह्माण्डीय व्यवस्था के सम्बन्ध में सम्पूर्ण व्यक्ति के असन्तुलन के रूप में समझती है। भवरोगवैद्य इस समग्रता को अन्तिम स्तर तक विस्तारित करता है: संसार, इच्छा, निराशा और पुनर्जन्म के आवर्ती चक्र के साथ सांसारिक अस्तित्व, स्वयं एक रोग है और मुक्ति उपचार है। कोट्टक्कल और त्रिशूर की महान आयुर्वेदिक परम्परा लक्षणों का उपचार करती है; भवरोगवैद्य जड़ का। शबरीमला की तीर्थयात्रा इस मूल रोग के लिए परम्परा के निर्धारित उपचारों में से एक है।

When to Chant

कब जपें

Chant when the fundamental suffering of existence, the ache of unfulfilled longing, the sorrow of impermanence, feels like a chronic disease requiring the Lord's diagnosis.

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