ॐ सर्वान्तरात्मने नमः
सर्वान्तरात्मा
Sarvāntarātmā
Root: sarva + antar + ātman
अर्थ
The inner self of all, whose consciousness is the deepest self of every being , not a self among selves but the universal Self that all individual selves rest within
सबकी अंतरात्मा, जिनकी चेतना हर प्राणी का सबसे गहरा स्वयं है , स्वयंता में एक स्वयं नहीं बल्कि वह सार्वभौमिक आत्मा जिसमें सभी व्यक्तिगत आत्माएँ विश्राम करती हैं
शब्द-दर-शब्द विश्लेषण
सर्व
all, every
सर्व, सभी
अन्तर्
within, the innermost
अंतर, भीतर
आत्मन्
self, the universal self, consciousness
आत्मन्, आत्मा, चेतना
आधुनिक संदर्भ
सर्वान्तरात्मा (सबकी अंतरात्मा) इस सहस्रनाम के सबसे दार्शनिक रूप से पूर्ण नामों में से एक है। यह सर्वान्तर्यामी (#393) गुणवत्ता को आत्मन् आयाम के साथ जोड़ता है। उपनिषदीय महावाक्य 'अयम् आत्मा ब्रह्म' (यह आत्मा ब्रह्म है) वेदांत की भाषा में वही अंतर्दृष्टि है। शिव सर्वान्तरात्मा के रूप में: जब आप अपना सबसे गहरा स्वयं खोजते हैं, तो आप शिव को पाते हैं। इसीलिए रमण महर्षि का स्व-जिज्ञासा मार्ग ('मैं कौन हूँ?') सीधे शिव तक ले जाता है।
कब जपें
ॐChant as one of the deepest of all non-dual affirmations: Shiva is the inner self of all beings, and recognising this in one's own being is the direct path to liberation.
और मोक्ष नाम
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