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ॐ जगत्प्रभवे नमः

जगत्प्रभुः

Jagatprabhūḥ

Root: jagat + prabhū

Cosmic Order·ब्रह्माण्डीय व्यवस्था
Meaning

अर्थ

Master of the universe, whose prabhutā (mastery, lordship arising from one's own inherent greatness) over all existence is self-evident and self-established

ब्रह्माण्ड के स्वामी, जिनकी समस्त अस्तित्व पर प्रभुता (स्वामित्व, अपनी अंतर्निहित महानता से उत्पन्न) स्वयंस्पष्ट और स्वयंस्थापित है

Word-by-Word Breakdown

शब्द-दर-शब्द विश्लेषण

जगत्

the universe, all that moves and exists

जगत्, ब्रह्माण्ड, समस्त चराचर

प्रभु

master, lord, one whose greatness is inherent

प्रभु, स्वामी, जिनकी महानता अंतर्निहित है

Modern Context

आधुनिक संदर्भ

जगत्प्रभु (ब्रह्माण्ड के स्वामी) शिव को प्रभु का उपयोग करते हुए नामित करता है। संस्कृत प्रभु (प्र + भू से) एक ऐसे स्वामित्व का वर्णन करता है जो अंतर्निहित है न कि प्रदत्त: प्रभु इसलिए स्वामी है क्योंकि वे जो हैं, न किसी पद की वजह से। जगत्प्रभु ब्रह्माण्ड का स्वामी है क्योंकि ब्रह्माण्ड उनके अपने अस्तित्व की अभिव्यक्ति है। 'प्रभु' शब्द भारतीय भक्ति शब्दावली में इतनी गहराई से प्रवेश कर चुका है कि यह कई परंपराओं में संतों, शिक्षकों और दिव्य के लिए एक सामान्य सम्मानजनक बन गया है।

When to Chant

कब जपें

Chant to invoke Shiva as Jagatprabhū , the master of the universe whose mastery is not conferred from outside but is inherent in his very nature.

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