ॐ महावैश्वानराय नमः
महावैश्वानरः
Mahāvaiśvānaraḥ
Root: mahā + vaiśvānara
अर्थ
The supreme universal fire, whose being encompasses and exceeds the Vaiśvānara (the cosmic fire that pervades all beings as the digestive principle) , the divine fire that burns at the heart of all existence
परम सार्वभौमिक अग्नि, जिनका अस्तित्व वैश्वानर (वह ब्रह्माण्डीय अग्नि जो पाचन सिद्धांत के रूप में सभी प्राणियों में व्याप्त है) को समेटता और पार करता है , वह दिव्य अग्नि जो समस्त अस्तित्व के केन्द्र में जलती है
शब्द-दर-शब्द विश्लेषण
महा
great, supreme
महान, परम
वैश्वानर
the cosmic fire, the fire that belongs to all beings, the universal digestive fire
वैश्वानर, ब्रह्माण्डीय अग्नि, सभी प्राणियों की अग्नि
आधुनिक संदर्भ
महावैश्वानर (परम सार्वभौमिक अग्नि) शिव को सबसे पुरानी वैदिक धर्मशास्त्रीय श्रेणियों में से एक के माध्यम से नामित करता है। चाँदोग्य उपनिषद में वैश्वानर को हर जीवित प्राणी में पाचन अग्नि के रूप में रहने वाली ब्रह्माण्डीय अग्नि के रूप में वर्णित किया गया है। आयुर्वेद में अग्नि (पाचन सिद्धांत) की समकालीन समझ और सूर्य का गहरा अर्थ दोनों महावैश्वानर के सिद्धांत की आंशिक अभिव्यक्तियाँ हैं।
कब जपें
ॐChant to invoke Shiva as the great Vaiśvānara , the cosmic fire whose warmth is at the heart of every living being, every sacrificial flame, and every star.
और ब्रह्माण्डीय व्यवस्था नाम
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