ॐ शिवानन्तगाय नमः
शिवानन्तगः
Śivānantagaḥ
Root: śiva + ananta + ga
अर्थ
Going toward the auspicious infinite, or the one who moves toward Shiva's infinity , the divine who perpetually moves into the inexhaustible depth of auspicious being
मंगलमय अनंत की ओर जाने वाले, या वह जो शिव की अनंतता की ओर बढ़ते हैं , वह दिव्य जो निरंतर मंगलमय होने की अक्षय गहराई में आगे बढ़ते हैं
शब्द-दर-शब्द विश्लेषण
शिव
auspicious, Shiva
शिव, मंगलमय
अनन्त
infinite, endless, without boundary
अनन्त, अनंत, असीमित
ग
going toward, the one who moves
ग, की ओर जाने वाला
आधुनिक संदर्भ
शिवानन्तग (मंगलमय अनंत की ओर जाने वाले) शिव को उस सत्ता के रूप में नामित करता है जो मंगलमय के अनंत आयाम की ओर और उसमें निरंतर बढ़ते हैं। दार्शनिक निहितार्थ गहरा है: अनंत के भीतर भी, निरंतर गति है , दिव्य स्थिर पूर्णता में विश्राम नहीं करता बल्कि मंगलमय की और गहरी अभिव्यक्तियों में निरंतर बढ़ता है। कश्मीर शैवाद्वैत की विमर्श (चेतना की आत्म-जागरूकता जो निरंतर अपनी गहराई का अन्वेषण करती है) की अवधारणा शिवानन्तग की दार्शनिक अभिव्यक्ति है।
कब जपें
ॐChant to invoke Shiva's inexhaustible infinitude , the ananta quality that ensures the journey toward Shiva never has a ceiling, always moving deeper into auspicious being.
और ब्रह्माण्डीय व्यवस्था नाम
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