ॐ सर्वमोक्षप्रदायकाय नमः
सर्वमोक्षप्रदायक
Sarvamokṣapradāyaka
Root: sarva + mokṣa + pradāyaka
अर्थ
The generous bestower of liberation to every soul who surrenders
सबको मोक्ष देने वाले, शरणागत हर आत्मा को मुक्ति प्रदान करने वाले
शब्द-दर-शब्द विश्लेषण
सर्व
all, to all
सब, सबको
मोक्ष
liberation, freedom from rebirth
मोक्ष, मुक्ति
प्रदायक
bestower, generous giver
प्रदाता, देने वाला
आधुनिक संदर्भ
चार पुरुषार्थों में मोक्ष सर्वोच्च है — और सर्वमोक्षप्रदायक ही उसे दे सकते हैं। न धन से मोक्ष मिलता है, न सत्ता से, न प्रसिद्धि से — केवल भगवान की कृपा से। गीता का अन्तिम श्लोक 'सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज, अहं त्वा सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुचः' — यही सर्वमोक्षप्रदायक का शाश्वत वचन है।
कब जपें
ॐChant during moksha-oriented meditation, Gita Chapter 18 final verse study, or when life's ultimate purpose becomes clear. Ideal during Vaikuntha Ekadashi and final-stage spiritual seeking.
और मोक्ष नाम
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