ॐ वसवे नमः
वसुः
Vasuḥ
Root: vas
अर्थ
The indwelling treasure who resides within every being as wealth
सबमें निवास करने वाला धन-स्वरूप, हर प्राणी का आन्तरिक खज़ाना
शब्द-दर-शब्द विश्लेषण
वसु
wealth, dweller, treasure
धन, निवासी, खज़ाना
आधुनिक संदर्भ
वसु दूसरी बार आया है (पहली बार नाम 104)। 'वसुधैव कुटुम्बकम्' (पूरी पृथ्वी एक परिवार है) इसी 'वसु' धातु से बना है। दोहराव बताता है कि भगवान का धन-स्वरूप और सबमें निवास करने का गुण सहस्रनाम का केन्द्रीय विषय है। जब मकर संक्रांति पर तिल-गुड़ बाँटकर कहते हैं 'तिळगुळ घ्या, गोड गोड बोला' (तिल-गुड़ लो, मीठा-मीठा बोलो), वो वसु का दान-भाव है।
कब जपें
ॐChant on Makar Sankranti, during Vasudhaiva Kutumbakam discussions, when sharing wealth or kindness, or when recognising the divine treasure dwelling within every person.
और समृद्धि नाम
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