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ॐ हुतभुजे नमः

हुतभुक्

Hutabhuk

Root: huta + bhuj

Devotion·भक्ति
Meaning

अर्थ

The receiver of all sacred fire-offerings across every yagya

सम्पूर्ण यज्ञों में अर्पित आहुतियों के ग्रहण करने वाले

Word-by-Word Breakdown

शब्द-दर-शब्द विश्लेषण

हुत

offered in fire

अग्नि में अर्पित

भुक्

consumer, receiver

ग्रहण करने वाला

Modern Context

आधुनिक संदर्भ

हुतभुक् तीसरी बार आया है (पहले नाम 249 और 394)। तीन बार आना दर्शाता है कि यज्ञ (अग्नि-पूजा) भगवान विष्णु के साथ सम्बन्ध का सबसे प्राचीन माध्यम है। गीता (9.16) में कृष्ण कहते हैं 'अहं क्रतुरहं यज्ञः स्वधाहमहमौषधम्। मन्त्रोऽहमहमेवाज्यम्,' मैं ही यज्ञ हूँ, आहुति हूँ, घी हूँ, मन्त्र हूँ। हुतभुक् की तिगुनी उपस्थिति कहती है: अग्नि से खिलाना भगवान का सबसे पुराना भोजन है।

When to Chant

कब जपें

Chant during havan, when offering camphor aarti, during Gita 9.16 study, or when the triple Hutabhuk drives home the centrality of fire-worship in Hindu practice.

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