ॐ सत्त्वस्थाय नमः
सत्त्वस्थः
Sattvasthḥ
Root: sattva + stha
अर्थ
He who is established in pure sattva, the quality of goodness
शुद्ध सत्त्वगुण में स्थित, जो सदा सात्विकता में विराजमान हैं
शब्द-दर-शब्द विश्लेषण
सत्त्व
goodness, purity, the quality of light
सत्त्व, शुद्धता, प्रकाश-गुण
स्थ
established in, dwelling in
में स्थित
आधुनिक संदर्भ
गीता के अनुसार प्रकृति तीन गुणों से बनी है: सत्त्व (शुद्धता), रजस् (गतिशीलता), और तमस् (जड़ता)। सात्विक भोजन (फल, दूध, दाल), सात्विक आचरण (सत्यभाषण, अहिंसा), और सात्विक वातावरण (स्वच्छ, शान्त) भारतीय जीवनशैली का आधार हैं। सत्त्वस्थ भगवान सदा शुद्ध सत्त्वगुण में स्थित हैं, रजस और तमस उन्हें छू नहीं सकते। सात्विक जीवन जीना भगवान के सबसे निकट रहना है।
कब जपें
ॐChant when cultivating sattva through diet and lifestyle, during Gita Chapter 14 (Gunatraya Vibhaga Yoga) study, during fasting, or when purifying daily choices.
और पवित्रता नाम
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