ॐ भोक्त्रे नमः
भोक्ता
Bhoktā
Root: bhuj
अर्थ
The supreme experiencer who receives and savours all offerings
परम भोक्ता, जो सभी अर्पणों को ग्रहण कर आनन्द लेते हैं
शब्द-दर-शब्द विश्लेषण
भोक्ता
enjoyer, experiencer, receiver
भोगने वाले, ग्रहण करने वाले
आधुनिक संदर्भ
भोक्ता तीसरी बार आया है (पहले नाम 142 और 403)। तीन बार दोहराव दर्शाता है कि भगवान सक्रिय रूप से भक्तों के अर्पण 'भोगते' (enjoy) हैं, यह सहस्रनाम का केन्द्रीय सन्देश है। भगवान उदासीन नहीं हैं, वो खाते हैं (भोग), सुनते हैं (प्रार्थना), देखते हैं (दर्शन)। जगन्नाथ मन्दिर पुरी की महाप्रसाद परम्परा इसी भोक्ता-भाव पर आधारित है: भगवान पहले खाते हैं, फिर भक्त।
कब जपें
ॐChant while offering naivedya, during Jagannath Puri Mahaprasad discussions, before meals, or when the Sahasranama's triple Bhoktā confirms that God truly receives what you give.
और भक्ति नाम
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