ॐ शुचये नमः
शुचिः
Śuciḥ
Root: śuc
अर्थ
The supremely pure one who sanctifies all who remember Him
परम शुद्ध, जिनका स्मरणमात्र से सब पवित्र हो जाते हैं
शब्द-दर-शब्द विश्लेषण
शुचि
pure, clean, resplendent
शुद्ध, पवित्र
आधुनिक संदर्भ
शुचि तीसरी बार आया है (पहले नाम 154 और 261)। तीन बार दोहराव शुचिता (purity) को भगवान का तीसरा सबसे दोहराया गया गुण बनाता है (सत्य 4x, अप्रमेयात्मा 4x, श्रीमान 4x, शुचि 3x)। शुद्धता भारतीय जीवन की धुरी है: शरीर की शुद्धि (स्नान), मन की शुद्धि (ध्यान), वाणी की शुद्धि (सत्य), और आहार की शुद्धि (सात्विक भोजन)। शुचि की तिगुनी उपस्थिति कहती है: शुद्ध रहो, शुद्ध रहो, शुद्ध रहो।
कब जपें
ॐChant after morning bath, during purification rituals, when the Sahasranama's triple shuchi strikes with cumulative force, or when inner cleanliness is the daily goal.
और पवित्रता नाम
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