ॐ पुण्याय नमः
पुण्यः
Puṇyaḥ
Root: puṇya
अर्थ
The embodiment of all sacred merit, supremely holy and purifying
स्वयं पुण्य का मूर्तिमान रूप, परम पवित्र और शुद्ध करने वाले
शब्द-दर-शब्द विश्लेषण
पुण्य
sacred merit, holy, virtuous
पुण्य, पवित्र
आधुनिक संदर्भ
पुण्य दूसरी बार आया है (पहली बार नाम 318)। यह 500वाँ नाम है, सहस्रनाम का ठीक आधा, और इस पवित्र स्थान पर 'पुण्य' (sacred merit) आना अत्यन्त सार्थक है। पहले नाम (विश्वम्, #1) से यहाँ तक पहुँचना अपने आप में पुण्य-कर्म है। भगवान कहते हैं: तुमने 500 नाम पढ़े/सुने, यह अपने आप में पुण्य है। अगले 500 तुम्हारी प्रतीक्षा कर रहे हैं।
कब जपें
ॐChant as THE HALFWAY MILESTONE PRAYER, during any virtue-generating act, when reaching significant life midpoints, or when the Sahasranama's divine architecture places Punya at its perfect centre.
और पवित्रता नाम
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