ॐ विवृद्धाय नमः
विवृद्धः
Vivṛddhaḥ
Root: vi + vṛdh
अर्थ
The fully grown, supremely exalted one who has transcended all growth
पूर्ण विकसित, सर्वोन्नत, जो सभी वृद्धि से परे बढ़ चुके हैं
शब्द-दर-शब्द विश्लेषण
विवृद्ध
fully grown, most exalted
पूर्ण विकसित, सर्वोन्नत
आधुनिक संदर्भ
विवृद्ध तीसरी बार आया है (पहले नाम 272 और 480)। वर्धन-वर्धमान-विवृद्ध त्रयी तीनों बार एक ही क्रम में आई है (270-272, 478-480, 660-662)। तीन बार 'वृद्धि-त्रयी'! बढ़ाने वाले (वर्धन) → सदा बढ़ने वाले (वर्धमान) → पूर्ण रूप से बढ़ चुके (विवृद्ध)। नर्सरी → बढ़ता पेड़ → पूर्ण विकसित बरगद। तीसरी बार = यह वृद्धि-यात्रा शाश्वत है, हर चक्र में दोहराई जाती है।
कब जपें
ॐChant during Vat Savitri Vrat, when the growth-triad completes its third cycle, when maturity is reached, or when the seedling-to-banyan journey is the meditation.
और मोक्ष नाम
← → arrow keys to navigate