ॐ उत्तराणाय नमः
उत्तरणः
Uttaraṇaḥ
Root: ud + tṛ
अर्थ
The deliverer who lifts every being across the ocean of worldly bondage
उद्धारक, जो हर प्राणी को संसार-बन्धन के सागर से पार उतारते हैं
शब्द-दर-शब्द विश्लेषण
उत्तरण
deliverer, one who causes to cross over
पार कराने वाले, उद्धारक
आधुनिक संदर्भ
उत्तरण तीसरी बार आया है (पहले नाम 316 और 498)। तीन बार 'भवसागर से पार कराने वाले!' भारतीय भक्ति-परम्परा में 'भवसागर' (ocean of worldly existence) सबसे प्रचलित रूपक है। 'तारो मोहे श्याम,' 'भवसागर तारण कारण हे,' और 'हरि तुम हरो जन की पीर' जैसे भजन इसी उत्तरण-भाव के हैं। तीसरी बार = तीन चक्रों में, तीन युगों में, भगवान सदा पार करा रहे हैं।
कब जपें
ॐChant during bhav-sagar themed bhajans, when life's ocean feels overwhelming, during the triple Uttaraṇa meditation, or when the divine boatman's triple appearance builds unshakeable trust.
और मोक्ष नाम
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