ॐ कृतज्ञाय नमः
कृतज्ञः
Kṛtajñaḥ
Root: kṛta + jña
अर्थ
He who gratefully remembers every devotee's service, the eternally thankful divine
जो हर भक्त की सेवा कृतज्ञतापूर्वक याद रखते हैं, शाश्वत आभारी दिव्य
शब्द-दर-शब्द विश्लेषण
कृत
done
किया गया
ज्ञ
knower
जानने वाला
आधुनिक संदर्भ
कृतज्ञ तीसरी बार आया है (पहले नाम 566 और 785)। तीन बार! भगवान की कृतज्ञता (gratitude) तीन चक्रों में शाश्वत है। शबरी के बेर, विदुर की साग, सुदामा का पोहा: भगवान कभी नहीं भूलते। तीसरी बार सहस्रनाम के अन्त में = अन्तिम क्षण तक भगवान आपकी भक्ति याद रखते हैं। 965 नामों की यात्रा = 965 बार कृतज्ञता।
कब जपें
ॐChant when devotion feels unnoticed, during the triple Kritajna's climactic third appearance, or when divine gratitude for human effort is the deepest comfort.
और करुणा नाम
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