ॐ सहस्ररूपाय नमः
सहस्ररूपः
Sahasrarūpaḥ
Root: sahasra + rūpa
अर्थ
He of a thousand forms, the specific Rigvedic description of the Purushottama whose body encompasses a thousand heads, eyes, and feet
सहस्र रूप वाले, ऋग्वेद में पुरुषोत्तम का वह विशिष्ट वर्णन जिनका शरीर सहस्र मस्तकों, नेत्रों और पादों को समेटता है
शब्द-दर-शब्द विश्लेषण
सहस्र
thousand
सहस्र, हजार
रूप
form
रूप
आधुनिक संदर्भ
सहस्ररूप ऋग्वेद के पुरुष सूक्त के पुरुषोत्तम का विशेष संदर्भ देता है: 'सहस्रशीर्षा पुरुषः सहस्राक्षः सहस्रपात्'। अय्यप्पा सहस्ररूप के रूप में इस सबसे प्राचीन ब्रह्माण्डीय शरीर वर्णन को विरासत में पाते हैं।
कब जपें
ॐChant when the Purusha Sukta is being recited, recognising the Lord as the Sahasrarūpa Purushottama whose thousand-formed cosmic body the hymn describes.
और ब्रह्माण्डीय व्यवस्था नाम
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