ॐ महाभुजाय नमः
महाभुजः
Mahābhujaḥ
Root: mahā + bhuja
अर्थ
The great-armed one, whose divine arms are mighty enough to protect all worlds and to embrace every seeker who comes to them
महाभुज, जिनकी दिव्य भुजाएँ इतनी शक्तिशाली हैं कि सभी लोकों की रक्षा कर सकें और उनके पास आने वाले प्रत्येक साधक को आलिंगन दे सकें
शब्द-दर-शब्द विश्लेषण
महा
great, mighty
महान, शक्तिशाली
भुज
arm
भुजा, बाँह
आधुनिक संदर्भ
महाभुज दत्तात्रेय की भुजाओं की शक्ति का उत्सव मनाता है, जो एक साथ त्रिमूर्ति की चार भुजाएँ हैं: ब्रह्मा की भुजाएँ जो सभी लोकों की सृजना करती हैं, विष्णु की भुजाएँ जो उन्हें बनाए रखती और रक्षा करती हैं, और शिव की भुजाएँ जो अपना काम पूरा कर चुके को विलीन करती हैं। गीता में कृष्ण अर्जुन को 'महाबाहो' (2.26) सम्बोधित करते हैं। शक्तिशाली दिव्य भुजाओं की छवि किसी भी भक्ति परम्परा में सबसे मनोवैज्ञानिक रूप से सान्त्वनादायक है। गाणगापुर में जहाँ भक्त दत्तात्रेय की पादुकाओं की परिक्रमा करते हुए गर्भगृह की दीवारें छूते हैं, वे प्रतीकात्मक रूप से महाभुज की भुजाओं को छू रहे होते हैं।
कब जपें
ॐChant when seeking the strong protective embrace of the divine, in situations requiring mighty divine intervention, or when welcoming Dattatreya's four great arms as the source of cosmic protection.
और रक्षा नाम
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