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ॐ सच्चिदानन्दाय नमः

सच्चिदानन्दः

Saccidānandaḥ

Root: sat + cit + ānanda

Cosmic Order·ब्रह्माण्डीय व्यवस्था
Meaning

अर्थ

Existence-consciousness-bliss, the living embodiment of the triple formula that Vedanta uses to indicate the indescribable nature of Brahman

सत्-चित्-आनन्द, उस त्रिगुण सूत्र का जीवन्त अवतरण जिसका उपयोग वेदान्त ब्रह्म की अकथनीय प्रकृति को इंगित करने के लिए करता है

Word-by-Word Breakdown

शब्द-दर-शब्द विश्लेषण

सत्

pure existence, being

सत्, शुद्ध अस्तित्व

चित्

pure consciousness

चित्, शुद्ध चेतना

आनन्द

pure bliss

आनन्द, शुद्ध सुख

Modern Context

आधुनिक संदर्भ

सच्चिदानन्द सम्पूर्ण वेदान्त परम्परा में ब्रह्म का सबसे सार्वभौमिक रूप से मान्यता प्राप्त नाम है: सत् (शुद्ध होना), चित् (शुद्ध चेतना) और आनन्द (शुद्ध सुख) एक अविभाज्य वास्तविकता में संयुक्त। सच्चिदानन्द सूत्र शंकराचार्य से विवेकानन्द से रमण महर्षि तक शिक्षकों द्वारा ब्रह्म की ओर सबसे प्रत्यक्ष संकेतक के रूप में उपयोग किया जाता है। हर दत्त मन्दिर के उद्घाटन समारोह में प्राथमिक आवाहन के रूप में सच्चिदानन्द का जप शामिल है।

When to Chant

कब जपें

Chant as the most complete description of Dattatreya's essential nature, or when seeking to hold the triple Vedantic insight of existence, consciousness, and bliss as one undivided reality.

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