ॐ सहस्राक्षाय नमः
सहस्राक्षः
Sahasrākṣaḥ
Root: sahasra + akṣa
अर्थ
The thousand-eyed, whose awareness perceives every point in existence simultaneously, whose vision leaves nothing in the cosmos unseen or unwitnessed
सहस्र-नेत्री, जिनकी जागरूकता एक साथ अस्तित्व के हर बिंदु को देखती है, जिनकी दृष्टि ब्रह्माण्ड में कुछ भी न देखा हुआ या न साक्षी हुआ नहीं छोड़ती
शब्द-दर-शब्द विश्लेषण
सहस्र
thousand, innumerable
सहस्र, अनगिनत
अक्ष
eye, the seeing faculty
नेत्र, देखने की शक्ति
आधुनिक संदर्भ
सहस्राक्ष (सहस्र-नेत्री) रुद्र सहस्रनाम का 250वाँ नाम है, जो एक संख्यात्मक रूप से महत्त्वपूर्ण स्थान है। सहस्र नेत्र दिव्य सर्वज्ञता की एक वैदिक छवि हैं। शिव के त्र्यम्बक रूप (नाम 6 में तीन नेत्र) से सहस्राक्ष तक विस्तार होता है: यदि तीन नेत्र सूर्य, चन्द्र और अग्नि का प्रतिनिधित्व करते हैं, तो सहस्र नेत्र ब्रह्माण्ड में अनुभव और प्रकाश के हर संभव स्रोत का। भारत के मंदिर वास्तुकला में बाहरी सतह पर असंख्य देव-प्रतिमाएँ इसी बोध की अभिव्यक्ति हैं।
कब जपें
ॐChant at the numerologically significant 250th position to honour Shiva's omniscient sight, invoking the awareness that sees everything without exception.
और ज्ञान नाम
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