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360

ॐ आनन्दसागराय नमः

आनन्दसागरः

Ānandasāgaraḥ

Root: ānanda + sāgara

Liberation·मोक्ष
Meaning

अर्थ

Ocean of bliss, the boundless, fathomless reservoir of divine joy from which every experience of happiness in all the worlds ultimately draws its sustenance

आनन्द का सागर, दिव्य आनंद का वह असीम, अथाह जलाशय जिससे सभी लोकों में सुख का प्रत्येक अनुभव अंततः अपना पोषण प्राप्त करता है

Word-by-Word Breakdown

शब्द-दर-शब्द विश्लेषण

आनन्द

bliss, beatitude, the supreme joy

आनन्द, परमसुख, चरम आनंद

सागर

ocean, the boundless reservoir, the fathomless deep

सागर, असीम जलाशय, अथाह गहराई

Modern Context

आधुनिक संदर्भ

आनन्दसागर (आनन्द का सागर) बैच 5 का समापन नाम है। सागर की छवि आनन्द के लिए परिपूर्ण है क्योंकि सागर बिना कभी भरे सभी जलों को प्राप्त करता है और बिना कभी खाली हुए सभी जलों को देता है: आनन्द बिना क्षीण हुए शिव से हर प्राणी की ओर प्रवाहित होता है। बैच का समापन युग्म शिवानन्द (आनन्द जो शिव है) से शुरू और आनन्दसागर (उस आनन्द का सागर) पर समाप्त: एक पूर्ण चिंतन बनाता है। नाम 331 से 360 तक की यात्रा ने हमें शिव के पूर्ण गुणों के माध्यम से ले जाया: कोमलता (मृड), सर्वोच्चता (परमात्मा), सुरक्षा (भक्तरक्षक), और अब वह विशाल आनन्द जो सभी को समेटता है।

When to Chant

कब जपें

Chant as the closing name of this batch, where Ānandasāgara's boundless bliss-ocean is invoked as both the source and destination of the entire spiritual journey.

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