ॐ रसरूपाय नमः
रसरूप
Rasarūpa
Root: rasa + rūpa
अर्थ
He who is the essence and flavour of all experience
रस (आनन्द/स्वाद) के स्वरूप, सभी अनुभवों के सार
शब्द-दर-शब्द विश्लेषण
रस
essence, flavour, juice, aesthetic experience, delight
रस, स्वाद, सार, आनन्द
रूप
form, embodiment
रूप, स्वरूप
आधुनिक संदर्भ
गीता में कृष्ण कहते हैं 'रसोऽहमप्सु कौन्तेय' — मैं जल का रस (स्वाद) हूँ। रसरूप भगवान हर अनुभव के सार हैं — माँ के हाथ के खाने का स्वाद, बारिश की पहली बूँद का स्पर्श, बच्चे की मुस्कान का आनन्द। भारतीय काव्यशास्त्र में नौ रस हैं — शृंगार, हास्य, करुण, रौद्र, वीर, भयानक, बीभत्स, अद्भुत, शान्त — सबके मूल रसरूप हैं।
कब जपें
ॐChant when appreciating life's flavours, during cooking as a devotional act, or when studying rasa theory. Ideal during Annakut, cooking prasad, and when reading Bharata's Natyashastra.
और प्रेम नाम
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