ॐ सर्वधर्मस्वरूपिणे नमः
सर्वधर्मस्वरूपी
Sarvadharmasvarūpī
Root: sarva + dharma + svarūpī
अर्थ
He who embodies every form and aspect of dharma
समस्त धर्मों के स्वरूप, हर प्रकार के कर्तव्य और नियम का मूर्तिमान रूप
शब्द-दर-शब्द विश्लेषण
सर्व
all, every
सब, समस्त
धर्म
righteousness, duty, law, religion
धर्म, कर्तव्य, नियम
स्वरूपी
one who embodies, whose very form is
स्वरूप वाले, जिनका रूप ही है
आधुनिक संदर्भ
गीता के अन्तिम श्लोक में कृष्ण कहते हैं 'सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज' — सब धर्मों को छोड़कर मेरी शरण आओ। सर्वधर्मस्वरूपी वही भगवान हैं जो स्वयं सब धर्मों का स्वरूप हैं। पुत्र-धर्म, पितृ-धर्म, राज-धर्म, प्रजा-धर्म — सब भगवान में एक हो जाते हैं। जब कर्तव्यों में टकराव हो, सर्वधर्मस्वरूपी मार्गदर्शन देते हैं।
कब जपें
ॐChant when duties conflict, during Gita Chapter 18 study, or when seeking moral integration. Ideal during ethical dilemmas and when life's responsibilities feel irreconcilable.
और ज्ञान नाम
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