ॐ सर्वशोकनिवारणाय नमः
सर्वशोकनिवारण
Sarvaśokanivāraṇa
Root: sarva + śoka + nivāraṇa
अर्थ
He who removes every form of grief and sorrow from the heart
सम्पूर्ण शोक (दुख/विषाद) को निवारण करने वाले, हर पीड़ा हटाने वाले
शब्द-दर-शब्द विश्लेषण
सर्व
all, every
सब
शोक
grief, sorrow, mourning, anguish
शोक, दुख, विलाप
निवारण
remover, preventer, one who dispels
निवारण, दूर करने वाला
आधुनिक संदर्भ
गीता का पहला अध्याय 'अर्जुनविषादयोग' है — अर्जुन के शोक से शुरू। अठारहवें अध्याय तक कृष्ण ने वह शोक पूरी तरह दूर कर दिया। सर्वशोकनिवारण वही भगवान हैं। जब किसी प्रिय को खो दें, जब नौकरी जाए, जब रिश्ता टूटे, जब स्वास्थ्य बिगड़े — शोक आता है। सर्वशोकनिवारण का जप उस शोक को धीरे-धीरे, पर निश्चित रूप से, दूर करता है।
कब जपें
ॐChant during bereavement, when sorrow overwhelms, or during Gita Chapter 1-2 study. Ideal during shraddha, Pitru Paksha, and when counselling the grief-stricken.
और उपचार नाम
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