ॐ सर्वेन्द्रियप्रियाय नमः
सर्वेन्द्रियप्रिय
Sarvendriyapriya
Root: sarva + indriya + priya
अर्थ
He who delights every sense organ with his divine presence
सम्पूर्ण इन्द्रियों को प्रिय, हर ज्ञानेन्द्रिय को आनन्दित करने वाले
शब्द-दर-शब्द विश्लेषण
सर्व
all, every
सब
इन्द्रिय
sense organ
इन्द्रिय
प्रिय
dear, pleasing, delightful
प्रिय, आनन्ददायक
आधुनिक संदर्भ
तिरुमला दर्शन में हर इन्द्रिय को आनन्द मिलता है — आँखों को मूर्ति का सौन्दर्य, कानों को सुप्रभातम् की ध्वनि, नाक को चन्दन-कपूर की सुगन्ध, जिह्वा को लड्डू प्रसाद का स्वाद, त्वचा को मंदिर की शीतल हवा। सर्वेन्द्रियप्रिय भगवान हर इन्द्रिय को एक साथ सन्तुष्ट करते हैं — कोई इन्द्रिय अतृप्त नहीं लौटती।
कब जपें
ॐChant during comprehensive puja, when all senses are engaged in worship, or when Tirumala's multi-sensory experience is recalled. Ideal during festival pujas and when worship engages the whole body.
और प्रेम नाम
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