ॐ सर्वयोगविनिःसृताय नमः
सर्वयोगविनिःसृतः
Sarvayogaviniḥsṛtaḥ
Root: sarva + yoga + viniḥsṛta
अर्थ
He who is realised through every form of yoga and union
जो सभी प्रकार के योगों (भक्ति, ज्ञान, कर्म, ध्यान) से प्राप्त होते हैं
शब्द-दर-शब्द विश्लेषण
सर्व
all
सब
योग
paths of union, spiritual disciplines
योग, साधना मार्ग
विनिःसृत
attained, realised, emerged through
प्राप्त, सिद्ध, प्रकट
आधुनिक संदर्भ
गीता में कृष्ण चार मुख्य योग बताते हैं: कर्म, भक्ति, ज्ञान, और ध्यान। कोई मंदिर में भजन गाकर भक्ति योग करता है, कोई ईमानदारी से नौकरी करके कर्म योग। ऋषिकेश का ध्यान योगी और वाराणसी का संस्कृत विद्वान, दोनों एक ही भगवान को पा रहे हैं। सर्वयोगविनिःसृत बताता है कि कोई भी सच्चा मार्ग भगवान तक पहुँचाता है।
कब जपें
ॐChant when confused about which spiritual path to follow, during Gita study on the four yogas, or when validating someone else's spiritual practice.
और ज्ञान नाम
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