ॐ धर्माध्यक्षाय नमः
धर्माध्यक्षः
Dharmādhyakṣaḥ
Root: dharma + adhyakṣa
अर्थ
The supreme judge who presides over all dharma
धर्म के अध्यक्ष, जो सत्य-न्याय की सर्वोच्च कुर्सी पर बैठे हैं
शब्द-दर-शब्द विश्लेषण
धर्म
righteousness, duty, cosmic law
धर्म, कर्तव्य
अध्यक्ष
presiding authority, judge
अध्यक्ष, न्यायाधीश
आधुनिक संदर्भ
भारत के सर्वोच्च न्यायालय के ऊपर 'यतो धर्मस्ततो जयः' लिखा है: जहाँ धर्म है वहाँ विजय है। धर्माध्यक्ष भगवान वही परम न्यायाधीश हैं जो सबके कर्मों का सही-सही न्याय करते हैं। जब कोर्ट में न्याय न मिले, जब सिस्टम फ़ेल करे, तब भी धर्माध्यक्ष का न्याय अटल है। कर्म का फल देर से आए लेकिन ज़रूर आता है।
कब जपें
ॐChant when seeking justice, before court hearings, during disputes, or when meditating on the perfect fairness of cosmic law.
और ज्ञान नाम
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