ॐ अर्हाय नमः
अर्हः
Arhaḥ
Root: arh
अर्थ
The supremely worthy one deserving all forms of worship
सम्पूर्ण पूजा और आराधना के परम योग्य
शब्द-दर-शब्द विश्लेषण
अर्ह
worthy, deserving, fit to receive
योग्य, पात्र
आधुनिक संदर्भ
अर्ह दूसरी बार आया है (पहली बार नाम 243)। अभिप्राय (386) → प्रियार्ह (387) → अर्ह (388), ये तीन नाम बैच 9 (241-243) से ज्यों की त्यों दोहराई गई त्रयी हैं। यह सहस्रनाम की सबसे स्पष्ट संरचनात्मक पुनरावृत्ति है। सन्देश: उद्देश्य (अभिप्राय) → प्रेम से अर्पण (प्रियार्ह) → भगवान सबसे योग्य (अर्ह)। यह तीन-चरणीय भक्ति-मार्ग है जो दो बार दोहराया गया।
कब जपें
ॐChant when the Abhiprāya-Priyārha-Arha triad appears together, during bhakti meditation on the three steps of devotion, or when the Sahasranama's divine architecture leaves you awestruck.
और भक्ति नाम
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