ॐ भूर्भुवःस्वस्तरवे नमः
भूर्भुवःस्वस्तरुः
Bhūrbhuvaḥsvastaruḥ
Root: bhūḥ + bhuvaḥ + svaḥ + taru
अर्थ
The cosmic tree rooted in the three worlds of earth, sky, and heaven
तीन लोकों (पृथ्वी, अन्तरिक्ष, स्वर्ग) में जड़ें जमाए ब्रह्माण्डीय वृक्ष
शब्द-दर-शब्द विश्लेषण
भूः
earth
पृथ्वी
भुवः
atmosphere
अन्तरिक्ष
स्वः
heaven
स्वर्ग
तरु
tree
वृक्ष
आधुनिक संदर्भ
गायत्री मन्त्र का 'ॐ भूर्भुवः स्वः' + अश्वत्थ (cosmic tree) = भूर्भुवःस्वस्तरु। यह सहस्रनाम का सबसे विशाल compound नाम है। भगवान वो 'ब्रह्माण्डीय वृक्ष' हैं जिसकी जड़ें तीनों लोकों में हैं। भारत में बरगद, पीपल, और नीम को पवित्र वृक्ष माना जाता है। लेकिन भूर्भुवःस्वस्तरु वो वृक्ष है जो तीनों लोकों में फैला है: जड़ें पृथ्वी में, तना अन्तरिक्ष में, शाखाएँ स्वर्ग में।
कब जपें
ॐChant during Gayatri recitation, Vat Savitri Vrat, when the three-world tree is the meditation, or when the Sahasranama's grandest compound name creates its most expansive vision.
और ब्रह्माण्डीय व्यवस्था नाम
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