ॐ प्रतर्दनाय नमः
प्रतर्दनः
Pratardanaḥ
Root: pra + tard
अर्थ
The great annihilator who destroys all darkness at the time of cosmic renewal
महा-संहारक, जो ब्रह्माण्डीय नवनिर्माण के समय सम्पूर्ण अन्धकार नष्ट करते हैं
शब्द-दर-शब्द विश्लेषण
प्रतर्दन
great destroyer, annihilator
महा-संहारक
आधुनिक संदर्भ
प्रतर्दन दूसरी बार आया है (पहली बार नाम 543)। पहली बार कौषीतकी उपनिषद और 'विनाश से नवनिर्माण' के संदर्भ में था। कृष्ण-लोहिताक्ष-प्रतर्दन त्रयी दोनों बार एक ही क्रम में आई है (541-543 और 818-820)। तीन नाम, दो बार: आकर्षण (कृष्ण) → सुरक्षा (लोहिताक्ष) → संहार (प्रतर्दन)। भगवान पहले प्रेम करते हैं, फिर रक्षा करते हैं, फिर शत्रु नष्ट करते हैं।
कब जपें
ॐChant during Kaushitaki Upanishad study, when the love-protect-destroy sequence is the meditation, or when the triple trio confirms the divine response protocol.
और संहार नाम
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